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ज्योतिष सेवा केंद्र · शास्त्रीय पंचांग अनुसार
रविवार
27 सितम्बर 2026
आज रविवार/मंगलवार है। राहु और मंगल के दिन कालसर्प दोष पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है।
आगामी सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
रविवार, 11 अक्टूबर 2026 (अमावस्या)
अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं, जो राहु और केतु के बीच फंसे कालसर्प दोष की शांति के लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।
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कुंडली में राहु-केतु की स्थिति और उनके फलादेश — 12 कालसर्प योग प्रकार, 12 कुंडली भाव।
| कालसर्प योग का प्रकार | राहु की स्थिति | केतु की स्थिति | संभावित प्रभाव / समस्याएं |
|---|---|---|---|
| 1. अनंत कालसर्प योग | राहु — प्रथम भाव | केतु — सप्तम भाव | शारीरिक और मानसिक समस्याएं |
| 2. कुलिक कालसर्प योग | राहु — द्वितीय भाव | केतु — अष्टम भाव | आर्थिक हानि और धन की हानि |
| 3. वासुकि कालसर्प योग | राहु — तृतीय भाव | केतु — नवम भाव | जीवन में अत्यधिक संघर्ष |
| 4. शंखपाल कालसर्प योग | राहु — चतुर्थ भाव | केतु — दशम भाव | भूमि / संपत्ति संबंधी मामले |
| 5. पद्म कालसर्प योग | राहु — पंचम भाव | केतु — एकादश भाव | शिक्षा और विद्या में बाधाएं |
| 6. महापद्म कालसर्प योग | राहु — षष्ठम भाव | केतु — द्वादश भाव | शारीरिक कष्ट, प्रेम संबंधी समस्या |
| 7. तक्षक कालसर्प योग | राहु — सप्तम भाव | केतु — प्रथम भाव | स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं |
| 8. कर्कोटक कालसर्प योग | राहु — अष्टम भाव | केतु — द्वितीय भाव | क्रोधी और चिड़चिड़ा स्वभाव |
| 9. शंखचूड़ कालसर्प योग | राहु — नवम भाव | केतु — तृतीय भाव | झूठ बोलने की आदत |
| 10. घातक कालसर्प योग | राहु — दशम भाव | केतु — चतुर्थ भाव | पारिवारिक कलह और समस्याएं |
| 11. विशधर कालसर्प योग | राहु — एकादश भाव | केतु — पंचम भाव | सामाजिक समस्याएं और अलगाव |
| 12. शेषनाग कालसर्प योग | राहु — षष्ठम भाव | केतु — द्वादश भाव | कानूनी परेशानियां और मुकदमे |
नोट: यह चार्ट सामान्य ज्योतिषीय जानकारी के लिए है। सटीक विश्लेषण के लिए कुंडली का विस्तृत अध्ययन आवश्यक है।
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